taiwan को दूसरा यूक्रेन बनाने की अमरीकी तैयारी

taiwan को दूसरा यूक्रेन बनाने की अमरीकी तैयारी
taiwan को दूसरा यूक्रेन बनाने की अमरीकी तैयारी


(नैंसी पेलोसी की ताइपे यात्रा, चीन की अमेरिका को धमकी)

संजीव ठाकुर

इस बात में दो मत नहीं कि अमेरिका जिस देश का समर्थन करता है वह निश्चित तौर पर मुसीबत में आ जाता है। दो बड़े उदाहरण अफगानिस्तान और यूक्रेन हमारे सामने हमें दिखाई देते हैं।

जब अफगानिस्तान को तालिबानी आतंकवादियों के खिलाफ अमेरिका की सख्त जरूरत थी तब अमेरिका ने पीठ दिखाकर एक हफ्ते में अपनी सेना को अमेरिका वापस बुला लिया और अफगानिस्तान को मुसीबत में छोड़ दिया था।इसी तरह यूक्रेन को रूस के खिलाफ भड़का कर उसे युद्ध की विभीषिका में ढकेल कर यूक्रेन को रूस के हाथों नेस्तनाबूद करा दिया। युद्ध अभी भी जारी है हालांकि रूस और यूक्रेन को इस युद्ध में भारी जनहानि और अरबों रुपयों का नुकसान हुआ है पर अमेरिका तथा नाटो देश बाहर बैठकर सिर्फ तमाशा ही देख रहे हैं।

इसी तरह अमेरिका taiwan को चीन के खिलाफ लगभग दो दशक से भड़का रहा है और उसे स्वतंत्र संप्रभुता वाला देश बनने की मान्यता दे दी है और अमेरिका के राष्ट्रपति खुले तौर पर ताइवान का चीन के खिलाफ साथ देने का बयान देते आ रहे हैं। चीन taiwan को अपनी राष्ट्रीय सीमा का हिस्सा मानता है और अमेरिका के किसी तरह भी ताइवान में हस्तक्षेप के खिलाफ उसने लगातार अमेरिका चेतावनी दी है।

चीन के ग्लोबल समाचार के अनुसार अमेरिका की हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान की राजधानी ताइपे पहुंच ही गई हैं। चीन की लगातार चेतावनी के बावजूद नैंसी ताइवान एडवांस फाइटर जेट के 24 में सवार होकर ताइवान की राजधानी ताइपे में विगत रात उतर गई। नैंसी के ताइवान पहुंचने के बाद चीन ने स्पष्ट रूप से अमेरिका को धमकी दी है कि हम टारगेट मिलट्री एक्शन लेंगे ,हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया है किन किन टारगेट पर कार्रवाई की धमकी दे रहा है।

इसके पहले हमेशा ताइवान और चीन तीनों ने अपनी मिलिट्री फोर्सेज को जंग के लिए तैयार रहने को कहा गया है तीनों देशों ने अपनी फौज को हाई अलर्ट पर रखा है। नैंसी पेलोसी ने ताइवान पहुंचने के बाद ताइवान के लिए अमेरिका की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की और कहा की यह यात्रा अमेरिकी नीति के अनुरूप ही है किसी भी तरह विपरीत नहीं है उन्होंने आगे कहा की हमारे कांग्रेसी प्रतिनिधि मंडल कि ताइवान यात्रा यहां के जीवंत लोकतंत्र का समर्थन करने के लिए अमेरिका की अटूट दोस्ती का सम्मान करने हेतु आई हैं।

उधर चीन की सेना के प्रवक्ता ने ऐलान किया है कि वह आगामी दो दिनों में दीवान के आसपास 6 से 10 क्षेत्रों में लाइव फायर एक्सरसाइज और सैन्य अभ्यास तथा प्रशिक्षण करेगा। चीन ने अमेरिका को स्पष्ट रूप से धमकी देते हुए कहा है इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उधर नैंसी ने अपने अधिकारी टि्वटर पर कहा है कि ताइवान के 23 मिलियन लोगों के साथ अमेरिका की एकजुटता ज्यादा मायने रखने वाली एवं महत्वपूर्ण है उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अब अमेरिका की है।

नैंसी की यह यात्रा उनके आधिकारिक बयानों के अनुसार अमेरिका की 1979 ताइवान संबंध अधिनियम के किसी भी तरह से विपरीत नहीं है यह यात्रा उसके अनुपालन में की गई है। चीन के आधिकारिक समाचार पत्र ग्लोबल समाचार ने पहले कहा था यदि नैंसी का प्लेन ताइवान की तरफ आएगा तो उसे उड़ा दिया जाएगा पर ऐसा कुछ हुआ नहीं या तो अमेरिका चीन की धमकियों को बहुत हल्के से ले रहा है या वह चीन से युद्ध करने के लिए पूरी तरह से सैन्य रूप से सक्षम एवं तैयार है।

गौरतलब है की यूक्रेन को भी अमेरिका द्वारा लगातार भड़काने के समय रूस ने ऐसे ही यूक्रेन को लगातार युद्ध के लिए धमकाया था फिर अंततः उसने आक्रमण ही कर दिया और आज स्थिति आपके सामने है यूक्रेन बर्बादी के कगार पर है। अमेरिका को भी यह बात समझ लेना चाहिए कि चीन अब दो दशक पुराना देश नहीं रहा अब वह सामरिक, आर्थिक, तथा अन्य क्षेत्र में बहुत मजबूत है और विश्व की तीसरी शक्ति भी है। ताइवान को लगातार चीन के खिलाफ भड़काने मैं अमेरिका पिछले दो दशक से लगा हुआ है।

ताइवान की सैन्य शक्ति ईतनी मजबूत नहीं है कि वह चीन के सामने किसी तरह भी टिक पाए। चीन ने रूस यूक्रेन युद्ध में रूस का साथ दिया था अब यदि चीन और ताइवान का अमेरिका के हस्तक्षेप से विवाद और युद्ध होता है तो ताइवान पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। अमेरिका का पूर्व का इतिहास रहा है कि उसने कभी किसी देश का खुलकर समर्थन नहीं किया एवं सैन्य मदद नहीं की है।

ऐसे में यदि चीन रूप के समर्थन से ताइवान के साथ युद्ध करता है और यदि ताइवान के साथ अमेरिका और यूरोपीय देश खड़े होते हैं तो विश्व युद्ध होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ताईवान को दूसरा यूक्रेन होने से बचाया भी नहीं जा सकता है। क्योंकि चीन के प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से बता दिया है नैंसी की ताइवान यात्रा चीन की की संप्रभुता पर खुला हस्तक्षेप है और यह बात चीन किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं करेगा।

उल्लेखनीय है कि चीन और रूस के प्रशासक शी जिनपिंग और पुतिन विस्तार वादी नीति के बड़े पोषक हैं और अपने देश को किसी भी युद्ध की परिस्थिति में झोंकने से परहेज नहीं करने वालों में से हैं। यदि अमेरिका लगातार ताइवान में इसी तरह चीन की नीतियों के विरुद्ध हस्तक्षेप करता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब चीन और रूस मिलकर अमेरिका तथा यूरोपीय देशों के खिलाफ विश्व युद्ध करने से भी नहीं रुकेंगे। ऐसे में वैश्विक अशांति का खतरा सभी देशों पर मंडराने लगेगा।