भारत ने UN में AI के नैतिक उपयोग पर दिया विशेष जोर

भारत ने UN में AI के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मार्च 21, 2025 - 22:23
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भारत ने UN में AI के नैतिक उपयोग पर दिया विशेष जोर
भारत ने UN में AI के नैतिक उपयोग पर दिया विशेष जोर

(शाश्वत तिवारी)

न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की वकालत करते हुए कहा कि तकनीकी विकास को समावेशी और सुलभ बनाना आवश्यक है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यूएन-यूएनआईएस 2025 पैनल चर्चा के दौरान अपनी बात रखी।

हरीश ने चर्चा के दौरान भारत की ओर से AI को सुशासन और विकास में शामिल करने के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत ने AI तकनीक को नागरिकों की भलाई के लिए उपयोग करने में कई सफल पहलें की हैं। उनका मानना है कि AI का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग सामाजिक भलाई और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए।

भारतीय राजदूत ने कहा कि भारत ने राष्ट्रीय एआई मिशन और ओपन-सोर्स डिजिटल टूल्स के माध्यम से तकनीकी असमानता को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इन टूल्स को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया है ताकि अन्य देश भी इसका लाभ उठा सकें।

हरीश ने उदाहरण देते हुए बताया कि भारत में राष्ट्रीय बायोमेट्रिक प्रणाली और वित्तीय समावेशन पहल जैसे आधार और यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने नागरिकों को डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि अब देश के छोटे व्यापारी और ग्रामीण इलाकों के लोग भी बिना किसी तकनीकी ज्ञान के डिजिटल लेनदेन कर सकते हैं।

हरीश ने आगे कहा कि AI का प्रभावी और नैतिक उपयोग सरकारों को बेहतर नीति निर्माण में सक्षम बना सकता है। उन्होंने भारत की विभिन्न सरकारी योजनाओं में AI के प्रभावी उपयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत ने सुनिश्चित किया है कि AI का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में हो, जिससे आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। इसके अतिरिक्त, भारत ने AI आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों को भी अपनाया है।

भारतीय राजदूत ने कहा, "AI सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। हमें डिजिटल और AI युग में किसी भी देश या व्यक्ति को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। भारत इस दृष्टिकोण को अपनाते हुए अपने अनुभव और तकनीकी समाधानों को विश्व के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है।"

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने अपने डिजिटल गवर्नेंस मॉडल को ओपन-सोर्स प्रारूप में उपलब्ध कराया है, जिससे अन्य विकासशील देश भी इससे सीख सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की इस पहल को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सराहा है। भारत ने यह स्पष्ट किया है कि AI का नैतिक और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है। AI को सभी के लिए सुलभ बनाना और इसका उपयोग सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए करना भारत की प्राथमिकता बनी हुई है।

इस दृष्टिकोण के तहत, भारत ने यह संदेश दिया कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के हर तबके तक पहुंचे।

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